बड़ा सवाल: एक तरफ टोल पर पुलिस का अभियान, तो दूसरी तरफ बस्ती टोल और बड़ेवन पर अवैध स्टैंडों का धड़ल्ले से संचालन कैसे?
जब पुलिस और यातायात विभाग शहरभर में विशेष अभियान चला रहा है, तो इन अवांछित और अवैध अड्डों पर अब तक प्रशासनिक बुलडोजर या सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या खाकी की नजर इन अवैध स्टैंडों पर नहीं पड़ती, या फिर किसी अनदेखी शह के कारण इन्हें खुली छूट मिली हुई है?
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में पुलिस का यातायात अभियान: एक तरफ सख्ती, तो दूसरी तरफ बस्ती टोल और बड़ेवन पर अवैध स्टैंडों को लेकर चुप्पी क्यों?
- बस्ती पुलिस का कड़ा रुख: यातायात निदेशालय के निर्देश पर जनपद में चलाया गया विशेष चेकिंग अभियान।
- टोल नाके पर ताबड़तोड़ कार्रवाई: तीन सवारी (ट्रिपल राइडिंग), ड्रिंक एंड ड्राइव और प्रेशर हॉर्न के खिलाफ यातायात पुलिस की सख्ती।
- बृजेश सिंह (CO यातायात) और कुलदीप त्रिपाठी (TI) के नेतृत्व में मुख्य टोल नाके पर कसी गई लगाम।
- बड़ा सवाल: एक तरफ टोल पर पुलिस का अभियान, तो दूसरी तरफ बस्ती टोल और बड़ेवन पर अवैध स्टैंडों का धड़ल्ले से संचालन कैसे?
- जाम और हादसों का खतरा: अवैध टैक्सी स्टैंडों के चलते सड़कों पर बढ़ रही समस्या, जनता ने की स्थाई कार्रवाई की मांग।
बस्ती: यातायात निदेशालय के स्पष्ट निर्देशों और पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह के कुशल निर्देशन में जनपद में यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू हो गया है। अपर पुलिस अधीक्षक श्यामकांत के पर्यवेक्षण और क्षेत्राधिकारी यातायात बृजेश सिंह के नेतृत्व में चलाए गए इस विशेष अभियान के तहत यातायात प्रभारी कुलदीप त्रिपाठी और उनकी टीम ने मुख्य टोल नाके पर मोर्चा संभाला।यातायात निदेशालय, लखनऊ के आदेश और पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह के निर्देशन में बस्ती में सख्ती का बोर्ड तो लगा है, लेकिन जमीन पर यह सख्ती सिलेक्टिव नजर आ रही है। अपर पुलिस अधीक्षक श्यामकांत के पर्यवेक्षण और सीओ यातायात बृजेश सिंह के नेतृत्व में प्रभारी यातायात कुलदीप त्रिपाठी की टीम ने टोल नाके पर मोर्चा संभाल कर ट्रिपल राइडिंग, ड्रिंक एंड ड्राइव, प्रेशर हॉर्न के खिलाफ अभियान तेज किया है।
पुलिस का दावा है कि यह अभियान जान बचाने के लिए है। सवाल है – जान अगर सड़क पर है तो वह सिर्फ टोल पर ही क्यों खतरे में है, बड़ेवन और टोल प्लाजा पर बने अवैध अड्डों पर क्यों नहीं?
कागज पर आंकड़े, सड़क पर जाम
यातायात पुलिस के अपने आंकड़े ही इस अभियान की सीमाएं उजागर करते हैं।
- पिछले अभियानों में: एक ही विशेष अभियान में 726 वाहनों का चालान कर 7.14 लाख रुपये वसूले गए थे।
- यातायात माह 2025 में: जिले भर में 17,285 वाहनों से 1 करोड़ 97 लाख 7 हजार रुपये का चालान किया गया, जिसमें 12,470 मामले सिर्फ बिना हेलमेट के थे।
- ग्रामीण चेकिंग में: महादेवा, लालगंज, बनकटी, सोनूपार जैसे चौराहों पर एक दिन में 226 वाहनों पर 2.32 लाख का चालान।
इस सघन चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस ने नियमों को ताक पर रखकर वाहन चलाने वालों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की:
- ट्रिपल राइडिंग (तीन सवारी): मोटरसाइकिल पर तीन-तीन बैठकर हवा से बातें करने वाले लापरवाह चालकों के धड़ल्ले से चालान काटे गए।
- ड्रिंक एंड ड्राइव: ब्रीथ एनालाइजर मशीनों के जरिए चालकों की चेकिंग की गई, ताकि शराब के नशे में वाहन चलाकर दूसरों की जान जोखिम में डालने वालों को सबक सिखाया जा सके।
- प्रेशर हॉर्न और अन्य उल्लंघन: ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले प्रेशर हॉर्न और बिना फिटनेस व दस्तावेजों के दौड़ने वाले वाहनों पर भी कड़ी कार्रवाई की गई।
टोल पर ब्रीथ एनालाइजर से यह जुर्माना वसूला जा रहा है। लेकिन बड़ेवन पर यही नियम क्यों मौन हैं? असली नासूर: बड़ेवन और बस्ती टोल प्लाजा
ग्राउंड रिपोर्ट कुछ और ही कहती है:
- बड़ेवन – जाम का परमानेंट हेडक्वार्टर: शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक रोजाना बड़ेवन से हरदिया तक भारी जाम लगता है। पिछले रविवार को पीजीटी परीक्षा के दौरान यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही, वाहन घंटों रेंगते रहे। जिला अस्पताल के पास भी हमेशा जाम बना रहता है और कई बार एंबुलेंस देर तक फंसी रह जाती हैं।
- ऑटो में 5 की जगह 12 सवारी: आरटीओ से 5 सवारी की अनुमति है, लेकिन रेलवे स्टेशन रोड, रोडवेज, कचहरी, बड़ेवन, टोल प्लाजा, मुड़घाट पर ऑटो में 10 से 12 सवारी तक बैठाकर ऑटो स्टार्ट होता है। यह खुलेआम ओवरलोडिंग है, जिस पर ₹20,000 तक जुर्माने का प्रावधान है, पर चालान कहां है?
- दो टोल प्लाजा, एक ही कहानी: लखनऊ-गोरखपुर खंड पर बस्ती की सीमा में दो टोल प्लाजा हैं। यहीं पर सड़क की पटरी पर कोई पार्किंग नहीं, पटरी पर कब्जा है। सड़क पर खड़े होकर सवारी भरने-उतारने से पूरा फोरलेन बाधित होता है।
बड़ा सवाल: पुलिस की इस मुस्तैदी के बीच बस्ती टोल और बड़ेवन पर अवैध स्टैंडों का संचालन कैसे?
एक तरफ जहां यातायात पुलिस और निदेशालय के आदेशों का हवाला देकर टोल नाके पर नियमों का पालन कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बस्ती टोल प्लाजा और बड़ेवन जैसी प्रमुख जगहों पर धड़ल्ले से चल रहे अवैध टैक्सी व ऑटो स्टैंड शहर की यातायात व्यवस्था को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं।
- सड़क पर अवैध कब्जा: इन अवैध स्टैंडों के कारण मुख्य मार्गों और चौराहों पर लगातार जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे आम जनता और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं तक फंस जाती हैं।
- हादसों का खतरा: सड़कों के बीचों-बीच अचानक सवारियां बैठाने और उतारने वाले इन वाहनों के कारण कभी भी कोई बड़ा सड़क हादसा हो सकता है।
- प्रशासनिक अनदेखी: जब पुलिस और यातायात विभाग शहरभर में विशेष अभियान चला रहा है, तो इन अवांछित और अवैध अड्डों पर अब तक प्रशासनिक बुलडोजर या सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या खाकी की नजर इन अवैध स्टैंडों पर नहीं पड़ती, या फिर किसी अनदेखी शह के कारण इन्हें खुली छूट मिली हुई है?
जनता अब यह पूछने लगी है कि क्या यातायात नियमों का यह चाबुक सिर्फ आम और छोटे वाहन चालकों के लिए ही है, या फिर इन अवैध स्टैंडों का संचालन करने वाले संरक्षण प्राप्त तत्वों पर भी कभी कोई ठोस कार्रवाई होगी? बस्ती की जनता को केवल टोल पर चालान की खानापूर्ति नहीं, बल्कि इन नासूर बन चुके अवैध स्टैंडों से स्थाई मुक्ति चाहिए।
मिलीभगत का पैटर्न – जनता के सवाल
यह चुप्पी सिर्फ लापरवाही नहीं, एक पैटर्न है। जनता पूछ रही है:
- वसूली का अर्थशास्त्र: क्या एक बाइक सवार से ₹1000 का चालान काटना आसान है, और 12 सवारी वाले ऑटो स्टैंड से रोजाना की अवैध वसूली पर हाथ डालना मुश्किल? ट्रिपल राइडिंग पर कैमरा है, ओवरलोड ऑटो स्टैंड पर कैमरा अंधा क्यों?
- प्रकाश और सुरक्षा: यातायात निरीक्षक की ही रिपोर्ट है कि बड़ेवन पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं है, हाईमास्ट क्रियाशील नहीं है। अंधेरे में अवैध स्टैंड हादसों को न्योता है। फिर भी एनएचएआई और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई क्यों नहीं?
- टोल से बचने का खेल: एसपी ने खुद मनौरी से बड़ेवन के बीच हादसों पर नियंत्रण के लिए संयुक्त जिम्मेदारी सौंपी है और टोल बचाने के लिए सर्विस लेन के दुरुपयोग को रोकने का आदेश दिया है। अगर पुलिस सर्विस लेन पर नाका लगा सकती है, तो सर्विस लेन को ही स्टैंड में बदलने वालों पर बुलडोजर क्यों नहीं?
- स्थायी समाधान कहां है? अतिक्रमण हटाओ अभियान में स्टेशन रोड की पटरी से अतिक्रमण हटाया गया, पर बड़ेवन और टोल पर अवैध टैक्सी स्टैंड उसी दिन वापस। क्या यह सिर्फ फोटो-ऑप अभियान है?
बस्ती को चालान की गिनती नहीं, कॉरिडोर क्लीयरेंस चाहिए। जब तक बस्ती टोल प्लाजा और बड़ेवन चौराहे पर लगे अवैध ऑटो-टैक्सी स्टैंडों को ध्वस्त कर वैध पार्किंग जोन, ई-रिक्शा बे और सीसीटीवी मॉनिटरिंग के साथ स्थायी व्यवस्था नहीं बनती, तब तक यह अभियान आम आदमी के लिए ‘जुर्माना उत्सव’ और अवैध स्टैंड माफिया के लिए ‘संरक्षण पर्व’ ही बना रहेगा।













